film review Tanhaji the unsung warrior


                                


इतिहास के एक परिचित वीर योद्धा की कहानी


फिल्म : तानाजी : अनसंग वॉरियर
निर्देशक : ओम राउत
अभिनय : अजय देवगन, सैफ अली खान, काजोल, शरद केलकर, नेहा शर्मा 
संगीत : अजय अतुल, सचेत परंपरा, शकर एहसान लॉय,संदीप शिरोदकर
अवधि : 137 मिनट
रेटिंग :  ⭐⭐⭐

          
यह फिल्म् 17वीं शताब्दी के भारतीय इतिहास के पन्नों को पलटती उसमें डूबकर लगभग अपरिचित वीर योद्धा की कहानी को हमारे सामने लाती है, जो छत्रपति सम्राट शिवाजी महाराज के एक वीर योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे की वीरता को दर्शाती है।
           

ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित किसी भी घटना को आज के आधुनिक समय में पर्दे पर दिखाना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती ही नहीं होती है बल्कि उसे कई खतरों का सामना भी करना पड़ता है। क्योंकि इसमें केवल अधिक परिश्रम बल्कि गहन अध्ययन और शोध की आवश्यकता होती है। क्योंकि सबसे बड़ा खतरा उस घटना, व्यक्ति या उस कालखंड और तथ्यों को बहुत संभालकर पूरी ईमानदारी से पर्दे पर उतारना होता है। हालांकि फिल्म बनाने के लिए थोड़ीबहुत छूट फिल्मकारों को यह रहती है कि वे इसमें अपनी कल्पना का समावेश कर सकता है।
            

इस फिल्म की जो सबसे बड़ी बात है, वह है अत्यानुधिक तकनीक का प्रयोग। दूसरे सैफ अली खान का किरदार, जो मुगल शासक औरंगजेब का खास सिपहासलाहकार उदयभान की भूमिका में है। जो है तो खलनायक की भूमिका में लेकिन अपने अभिनय और गेटअप के कारण वह मुख्य नायक तानाजी यानी अजय देवगन से कहीं भी कमतर नहीं लगता बल्कि उसके समकक्ष खड़ा दिखाई देता है। चूंकि फिल्म का केन्द्र बिन्दू तानाजी हैं जिसे अजय देवगन ने बेहतरीन ढंग से निभाया है। वे शिवाजी राव के विश्वासपात्र और बहुत ही खास सूबेदार हैं। वह अपनी जान पर खेलकर शिवाजी को दिया अपना वचन पूरा करते हैं कि वह कोंढाणा के किले को मुगलों के हाथ में नहीं जाने देंगे और वहां भगवा ध्वज लहाराएंगे। तानाजी की पत्नी के रूप में सावित्री बाई यानी काजोल की भूमिका बहुत छोटी होने के बावजूद आकर्षक है। कमला की भूमिका में नेहा शर्मा ठीक लगी हैं।


               हालांकि फिल्म के पहले हाफ में गति धीमी होती है लेकिन बाद में ठीक होने लगती है। दरअसल ऐसी फिल्मों की एक सीमा यह होती है कि इस तरह की फिल्मों को आम दर्शक ज्यादा पसंद नहीं करते क्योंकि उनमें मनोरंजन की गुंजाइश नहीं होती। यह एक एक्शन प्रधान फिल्म है इसलिए स्वाभाविक है कि युद्ध के दृश्य ज्यादा हैं। अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं या फिर ऐसे योद्धाओं के जीवन और संघर्ष को जानना चाहते हैं तो तानाजी आपको अच्छी लगेगी। एक बात इसमें जरुर खटकने वाली है कि बारबार भगवा शब्द का प्रयोग अखरने लगता है जबकि इससे बचा जा सकता था। इसकी तकनीक और सिनेमेटोग्राफी अच्छी है। सिने निर्माता के रूप में अजय देवगन सफल हुए हैं लेकिन अगर उनकी मंशा इसकी सीरीज बनाने की है तो उन्हें सोचनासमझना पड़ेगा।


©Dr. Sadhna Agrawal
Film Critic & Asst. Prof (DU)


Comments