रेटिंग ⭐⭐⭐⭐
- साधना अग्रवाल
जी 5 पर आई 'मेंटलहुड' नामक वेब सीरीज के 10 एपीसोड से अपने जमाने की चर्चित अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने वेब सीरीज में शानदार डेव्यू किया है।
इस शोज़ में दिखाया गया है कि बच्चों की परवरिश करना कोई हंसी-मजाक नहीं है। क्योंकि उनसे भी गलतियां हो जाती हैं। इसमें अति आधुनिक पांच सितारा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को जहां एक ओर अपने बच्चों के परफार्मेंस की चिंता है तो दूसरी ओर उनके सामने आपस में ही बढ़ -चढ़कर खुद को सर्वोच्च साबित करने की चुनौती है। वैसे भी एक कामकाजी महिला को बिना किसी शिकायत के मल्टीटास्किंग भूमिका को बखूबी जीना पड़ता है। यह बिल्कुल सही बात है कि अधिकांश उच्च वर्ग के लोगों की जिन्दगी जैसी दिखती है, असलियत में वैसी होती नहीं। कह सकते हैं कि उनकी तड़क-भड़क वाली जिंदगी खोखली ज्यादा होती है। अधिकांशतः झूठ मूठ का दिखावा ही होता है। यही कारण है कि अधिकांश स्त्रियां घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं लेकिन कुछ बोलती नहीं। चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी मानसिक प्रताड़ना क्यों न झेलनी पड़े। पर्दे के पीछे इनकी वास्तविकता क्या है, इसको बखूबी दिखाया गया है।
इस शोज़ की एक बड़ी खूबी यह है कि प्रत्येक एपीसोड में एक नयी समस्या से जूझते हुए अलग सीख मिलती है। जैसे- लड़के- लड़की में भेदभाव, गुडटच-बैडटच, बड़े होते बच्चों में शारीरिक बदलाव के लिए तैयार करना आदि।
मीरा की भूमिका को करिश्मा कपूर ने शानदार ढंग से जिया है । जो तीन बच्चों की मां हैं। वह एक ब्लाग लिखती है मेंटल माॅम के नाम से, जो काफी पापुलर हो जाता है। संध्या मृदुल ऐजो के रोल में अच्छी लगी हैं। डीनो माॅरिया आकाश की भूमिका में हैं, जो सुपर माॅम की जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं, जिनकी 5 साल की बेटी तारा मौलेस्ट की जाती है,उसको इस डर और पीड़ा से वे बाहर निकालते हैं। बाकी कलाकारों में संजय सूरी, जो करिश्मा कपूर के पति की भूमिका निभा रहे हैं, अच्छे लगते हैं। शिल्पा शुक्ला नम्रता के रोल में हैं। श्रुति सेठ ने दीक्षा साह की भूमिका बखूबी निभायी है।प्रीति के रोल में तिलोत्तमा शोम का काम भी सराहनीय है।
इस लाॅकडाउन के समय में जब पूरे परिवार को एक साथ समय बिताने का अवसर मिल रहा है, ऐसे में पूरे परिवार के साथ इस शोज़ को देख सकते हैं,जिसको देखकर आप निराश नहीं होंगे,ऐसा मुझे विश्वास है।
- साधना अग्रवाल
जी 5 पर आई 'मेंटलहुड' नामक वेब सीरीज के 10 एपीसोड से अपने जमाने की चर्चित अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने वेब सीरीज में शानदार डेव्यू किया है।
इस शोज़ में दिखाया गया है कि बच्चों की परवरिश करना कोई हंसी-मजाक नहीं है। क्योंकि उनसे भी गलतियां हो जाती हैं। इसमें अति आधुनिक पांच सितारा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को जहां एक ओर अपने बच्चों के परफार्मेंस की चिंता है तो दूसरी ओर उनके सामने आपस में ही बढ़ -चढ़कर खुद को सर्वोच्च साबित करने की चुनौती है। वैसे भी एक कामकाजी महिला को बिना किसी शिकायत के मल्टीटास्किंग भूमिका को बखूबी जीना पड़ता है। यह बिल्कुल सही बात है कि अधिकांश उच्च वर्ग के लोगों की जिन्दगी जैसी दिखती है, असलियत में वैसी होती नहीं। कह सकते हैं कि उनकी तड़क-भड़क वाली जिंदगी खोखली ज्यादा होती है। अधिकांशतः झूठ मूठ का दिखावा ही होता है। यही कारण है कि अधिकांश स्त्रियां घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं लेकिन कुछ बोलती नहीं। चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी मानसिक प्रताड़ना क्यों न झेलनी पड़े। पर्दे के पीछे इनकी वास्तविकता क्या है, इसको बखूबी दिखाया गया है।
इस शोज़ की एक बड़ी खूबी यह है कि प्रत्येक एपीसोड में एक नयी समस्या से जूझते हुए अलग सीख मिलती है। जैसे- लड़के- लड़की में भेदभाव, गुडटच-बैडटच, बड़े होते बच्चों में शारीरिक बदलाव के लिए तैयार करना आदि।
मीरा की भूमिका को करिश्मा कपूर ने शानदार ढंग से जिया है । जो तीन बच्चों की मां हैं। वह एक ब्लाग लिखती है मेंटल माॅम के नाम से, जो काफी पापुलर हो जाता है। संध्या मृदुल ऐजो के रोल में अच्छी लगी हैं। डीनो माॅरिया आकाश की भूमिका में हैं, जो सुपर माॅम की जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं, जिनकी 5 साल की बेटी तारा मौलेस्ट की जाती है,उसको इस डर और पीड़ा से वे बाहर निकालते हैं। बाकी कलाकारों में संजय सूरी, जो करिश्मा कपूर के पति की भूमिका निभा रहे हैं, अच्छे लगते हैं। शिल्पा शुक्ला नम्रता के रोल में हैं। श्रुति सेठ ने दीक्षा साह की भूमिका बखूबी निभायी है।प्रीति के रोल में तिलोत्तमा शोम का काम भी सराहनीय है।
इस लाॅकडाउन के समय में जब पूरे परिवार को एक साथ समय बिताने का अवसर मिल रहा है, ऐसे में पूरे परिवार के साथ इस शोज़ को देख सकते हैं,जिसको देखकर आप निराश नहीं होंगे,ऐसा मुझे विश्वास है।

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