अतरंगी रे

 © साधना अग्रवाल


बिना किसी रंग की अतरंगी रे


        

निर्देशक : आनंद एल राय

अभिनय : अक्षय कुमार, सारा अली खान, धनुष, सीमा बिश्वास 

संगीत : ए आर रहमान

ओटीटी : डिज्नी प्लस हॉटस्टार

रेटिंग : 2 स्टार 


तनु वेड्स मनु जैसी शानदार फिल्म बनाने वाले आनंद एल राय की अतरंगी रे डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर आई बेहद निराश करने वाली फिल्म है। जिसमें एक मनोरोगी लड़की रिंकू (सारा अली खान) है जो अपनी नानी (सीमा बिश्वास)  के साथ रहती है क्योंकि उसके माता—पिता का निधन हो चुका है। रिंकू अपनी कल्पना में जीने वाली लड़की है लेकिन उसकी नानी उसे सिरफिरी प्रेमिका समझती हैं। चूंकि रिंकू अपने प्रेमी के साथ कई बार घर से भाग चुकी है और नानी बार—बार उसे पकड़वाती हैं। इस बार नानी अपने आ​दमियों से एक लड़के धनुष को जबरदस्ती उठवाकर उससे रिंकू की शादी करवा देती हैं और दोनों को बिहार से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बिठाकर विदा कर देती हैं। जब दोनों होश में आते हैं तो उन्हें पता लगता है कि उनकी शादी हो चुकी है। दोनों की मंजिल अलग—अलग है क्योंकि उनकी जिन्दगी में पहले से ही कोई और है। 

              दोनों दिल्ली पहुंच जाते हैं। लेकिन धीरे—धीरे दोनों में प्यार हो जाता है। जैसा कि अमूमन फिल्मों में प्रेम त्रिकोण होता है, कुछ वैसा ही आनंद एल राय ने इसमें पिरोने की कोशिश की है लेकिन इसे संभालने में वे पूरी तरह नाकाम रहे हैं। दर्शकों के मन में कई सवाल उठने सहज स्वाभाविक है लेकिन उसके उत्तर फिल्म में तलाशना या फिर निर्देशक से कोई अपेक्षा करना बेईमानी लगने लगता है। जैसे दिल्ली में डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाला विशु (धनुष), जो एक तमिल भाषी है, वह अचानक बिहार क्यों आता है जबकि यहां उसके आने का कोई मकसद दिखाई नहीं देता। रिंकू की बीमारी का पता उसकी नानी को कैसे नहीं मालूम जबकि कुछ ही समय साथ रहने पर धनुष का लग जाता है? रिंकू बार—बार अपने जिस प्रेमी सज्जाद (अक्षय कुमार) के साथ भाग जाती है, उसका नाम और फोटो रिंकू धनुष को तो बता देती है लकिन नानी को नहीं। इसी तरह अचानक दिल्ली पहुंचने पर लड़कों के हॉस्टल में रुकने की परमिशन रिंकू को कैसे मिल जाती है और कोई सवाल भी नहीं करता ?

        अगर हम बात करें पटकथा की तो इसमें इतनी सलबटें हैं कि कितना भी फटकारें ये निकलने वाली नहीं। सारा अली खान ठीक लगी हैं लेकिन उन्हें अभी अभिनय सीखने की बहुत जरुरत है। हालांकि उन्होंने अपने तईं कोशिश की है और इसी चक्कर में बिंदास भी लगी हैं लेकिन चेहरे पर भाव भंगिमा गायब। अक्षय कुमार के चेहरे पर उम्र अब साफ दिखाई पड़ती है और वह रोमांटिक भूमिकाओं में मिसफिट नजर आने लगे हैं। इस फिल्म में वह एक जादूगर की भूमिका में हैं लेकिन अपना जादू दर्शकों पर नहीं चला सके। रांझणा में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले धनुष्य ने बेहतरीन किरदार निभाया है और दर्शकों की सहानुभूति और प्रशंसा भी बटोरने में कामयाब रहे हैं। हालांकि जब पटकथा ही कमजोर हो तो कलाकार भी कितना संभाल सकता है। जैसे जब धनुष्य तमिल भाषा में बोलने लगते हैं तो दर्शक भौंचक होकर उनकी बात समझने की कोशिश करता है और अंदाजे से काम चला लेता है।

       आनंद एल राय ने बिहार की एक प्रथा जिसे पकड़वा भी कहा जाता है जिसमें धोखे से जबरदस्ती शादी करा दी जाती है और लड़का अपने को ठगा महसूस करता है, उनकी यह फिल्म देखकर दर्शक भी खुद को ठगा महसूस करता है। पूरी फिल्म को ए आर रहमान ने अपने जानदार संगीत से खासकर एक गाने चकाचक हूं मैं , से संभालने की भरपूर कोशिश की है। 

     


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