दर्शकों के सपने चकनाचूर
फिल्म: मोतीचूर चकनाचूर
निर्देशक : देवामित्रा बिसवाल
अभिनय: नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, अथिया शेट्टी, विभा छिब्बर, नवनि परिहार
अवधि: 135 मिनट
मोतीचूर चकनाचूर फिल्म दो अलग-अलग व्यक्तियों की शादी की चाह को लेकर है। लड़की की इच्छा है कि उसकी शादी एक एन आर आई से हो। ताकि वह अपनी इमेज को सोशल मीडिया पर गर्व के साथ शेयर कर सके कि उसका पति विदेशी है या वह विदेश में रहती है। उसकी यह महत्वाकांक्षा इस हद तक बढ़ जाती है कि वह किसी से भी शादी करने के लिए तैयार हो जाती है और इस चक्कर में वह
तमाम लड़कों को एक-एक करके ठुकरा देती है जो विदेश में नहीं रहते।
दूसरी ओर एक 36 साल का पुरुष है जो शादी करने के लिए इतना उतावला है कि उसे चाहे काली,मोटी, लंबी, गोरी कोई भी हो लेकिन शादी के लिए एक अदद लड़की की जरूरत है और उसकी मां को दहेज की। इस क्रम में मां उसकी शादी एक बहुत मोटी लड़की से कराने के लिए तैयार हो जाती है और लड़का भी उस मोटी लड़की से शादी करने के लिए केवल इस शर्त पर तैयार होता है शादी के लिए आखिर एक लड़की चाहिए जो कि तुम हो। लेकिन दहेज की लालची मां को जब पता लगता है कि लड़की वाले दहेज के नाम पर कुछ नहीं दे रहे तो वह रिश्ता तोड़ देती है। लड़के के आगे फिर वही समस्या खड़ी हो जाती है कि उसको शादी के लिए एक लड़की नहीं मिल रही है जिसकी उसे जरूरत है और तलाश है। तभी पड़ोस में रहने वाली एनी उर्फ़ अनीता (अथिया शेट्टी) पर उसकी नजर पड़ती है और एनी को भी पता लगता है कि लड़का पुष्पेन्दर त्यागी (नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी) दुबई में रहता है। दोनों अपनी-अपनी तरह से सेटिंग करने में लग जाते हैं। खैर शादी हो जाती है और शादी होने के बाद एनी को जब पता लगता है कि उसके पति की दुबई में नौकरी छूट गई है इतना सुनते ही वह गुस्से में अलग होने का निर्णय कर लेती है और अपने पिता के घर वापस आती है लेकिन पिता के दरवाजे उसके लिए बंद हो जाते हैं । रूठना - मनाना चलता है। और धीरे-धीरे दोनों यह बात
समझ जाते हैं कि जो महत्वाकांक्षा और
सपने लड़का और लड़की पालते हैं असलियत में ऐसा नहीं हो सकता और एक हैप्पी एंडिंग के रूप में फिल्म खत्म हो जाती है।
इस फिल्म में एडिटिंग की बहुत ज्यादा जरूरत महसूस होती है। इस फिल्म की लंबाई को लगभग आधा घंटे
कम करके थोड़ी सी बेहतर बनाने की कोशिश हो सकती थी जो नहीं हो सकी। हालांकि इसमें दहेज प्रथा को लेकर और दिखावे को लेकर एक अच्छा संदेश देने की कोशिश की गई है कि लड़की केवल दिखाने के लिए किसी भी लड़के से शादी करने के लिए तैयार हो जाती है। और उसके एक बेतुके
सपने को पूरा करने के लिए उसके घर वाले भी उसे समझाने की जगह
बढ़ावा देते हैं। दूसरी ओर लड़के की मां को केवल दहेज की चिंता है जिसके लिए वह किसी भी हद तक जाकर समझौता करने के लिए तैयार है ।
पूरी फिल्म में कुछ जगहों पर कुछ अच्छे संवाद सुनाई पड़ते हैं। नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी एक अच्छे अभिनेता हैं लेकिन इस फिल्म में वह अपना प्रभाव नहीं डाल पाते। अथिया शेट्टी को देखकर लगता है कि उनको मेहनत की बहुत जरूरत है। इसका गीत-संगीत साधारण है।
©Dr. Sadhna Agrawal
Film Critic & Asst. Prof (DU)
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