Badla Movie Review ⭐⭐⭐


                                       वकील और मुवक्किल का वार्तालाप



फिल्म : बदला
निर्देशक : सुजॉय घोष
अभिनय : अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, अमृता सिंह, मानव कौल, टोनी ल्यूक, तनवीर घानी
अवधि : 120 मिनट
रेटिंग⭐⭐⭐स्टार


         यह फिल्म स्पैनिश थ्रिलर ' इनविजिवल गेस्ट' की रिमैक है। निर्देशक सुजॉय घोष इससे पहले विद्या वालन को लेकर कहानी बना चुके हैं। इसमें एक नामी वकील बहादुर गुप्ता (अमिताभ बच्चन) हैं जिन्होंने अपने 40 साल के कैरियर में कोई केस हारा नहीं है और दूसरी ओर उनकी मुवक्किल नैना सेठी (तापसी पन्नू) हैं। तो जाहिर है कि जैसे हम किसी डॉक्टर के पास इलाज कराने जाते हैं तो जब तक हम उसे पूरी बात नहीं बताते, वह समझ नहीं पाता कि हमें तकलीफ क्या है और उसका इलाज कैसे हो सकता है। ठीक इसी प्रकार अगर मामला क्रिमिनल है तो कोई वकील अपने मुवक्किल का केस तब तक ठीक से नहीं लड़ पाता जब तक कि पूरा सच जान ले। पूरी फिल्म नैना के घर एक टेवल पर बैठकर 3 घंटे की पूछताछ की है जिसमें बीचबीच में कहानी  समझाने और बताने के लिए फ्लैशबैक में जाती है। दोनों खुद को बेहद स्मार्ट समझते हैं।
                 नैना अपने वकील को पूरा सच बताकर टुकड़ोंटुकड़ों में कहानी बताती है कि वह अपने पति और एक बेटी से दूर कुछ दिनों के लिए अपने प्रेमी अर्जुन (टोनी ल्यूक) के साथ रह रही थी कि एक दिन सड़क पर कार चलाती नैना से एक गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता है और उसका चालक सनी बेहोश। घबराहट में नैना और अर्जुन जल्द ही फैसला करते हैं कि सनी की गाड़ी नैना ले जाकर किसी नदी में डुबो देती है जबकि सनी मरा नहीं था बल्कि जिंदा था। दूसरी ओर अर्जुन को वहां सनी की मां अमृता सिंह और पिता निर्मल (तनवीर घानी) अपने घर ले आते हैं लेकिन जैसे ही अर्जुन को पता लगता है कि सनी उनका बेटा है, वह किसी तरह उनके घर से चला जाता है। कोई ब्लैकमेलर नैना और अर्जुन की सच्चाई को जानकर ब्लैक मेल करने के लिए किसी होटल में बुलाता है लेकिन यहां अर्जुन का मर्डर हो जाता है और नैना जख्मी। लेकिन पुलिस को नैना पर शक है। नैना को उसी के घर में नजरबंद कर दिया जाता है वहां नैना का वकील मानव कौल एक बेहद काबिल वकील बहादुर गुप्ता को नैना का केस देता है और इसी सिलसिले में बहादुर गुप्ता नैना से बारीक से बारीक डिटेल जानना चाहता है। नैना की पूरी कहानी सुनकर बहादुर गुप्ता अपनी एक और कहानी बुनता है और अंतत: जब सच उद्घाटित होता है तो हैरान दर्शक बहादुर गुप्ता की कावलियत पर जोर से तालियां बजाने लगते हैं। पूरा सच जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी क्योंकि यह एक थ्रिलर फिल्म है तो इतना सस्पैंस तो बनता है।
          हालांकि यह एक बंद कमरे की थ्रिलर फिल्म है लेकिन एक वकील को कैसेकैसे अपने पैतरे दिखाने पड़ते हैं उसको देखने के लिए भी इस फिल्म को देखा जा सकता है। इसके कुछ संवाद बहुत अच्छे हैं जिन पर आप केवल मुस्कराते हैं बल्कि बीचबीच में ताली भी बजाने को मजबूर होते है। अनुभवी कलाकार अमिताभ बच्चन के सामने जहां कोई नया कलाकार असहज ही नहीं बल्कि छोटा भी महसूस करता है लेकिन चूंकि तापसी पन्नू उनके साथ पहले पिंक फिल्म कर चुकी हैं, इसमें बेहद आत्मविश्वास से भरी दिखती हैं और उनसे किसी भी मायने में कमतर नहीं लगती। हां उनका प्रेमी बना अर्जुन के साथ उनकी कैमिस्ट्री फिट नहीं बैठती जबकि वह काफी देर तक पर्दे पर दिखते हैं। अमृता सिंह को जितना भी रोल दिया गया है उसे उन्होंने बखूबी निभाया है। बाकी कलाकारों का काम ठीकठाक है।
        इस फिल्म की खासियत यह है कि यह अंत तक रहस्य और रोमांच बनाये रखती है और दर्शक अपनी सीट से हिल नहीं पाता और आगे क्या होगा की उसे उत्सुकता बनी रहती है। 

-Dr Sadhna Agrawal
Film Critic and Assistant Professor, Delhi University

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