Dhadak Review


धीमी है धड़क
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फिल्म:  धड़क
निर्देशक:  शशांक खेतान
अभिनय:  ईशान खट्टर, जाह्नवी कपूर, आशुतोष राणा, ऐश्वर्या नारकर,
संगीत : अजय-अतुल 
गीत :अमिताभ भट्टाचार्य 
अवधि:  138 मिनट 
रेटिंग :  2 स्टार

मराठी फिल्म 'सैराट' जो कि 2016 में नागराज मंजुले के निर्देशन में बनी थी, काफी लोकप्रिय रही थी। उसी को हिंदी में बॉलीवुड का तड़का लगाकर शशांक खेतान ने परोसा है। शशांक खेतान यूं तो प्रेम कहानियां और बॉलीवुड मसाला फिल्में बनाने में माहिर हैं, क्योंकि उनकी पिछली दो फिल्में 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' और 'हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया' को दर्शकों की भरपूर सराहना मिली थी। लेकिन दिक्कत यहां यह है कि निर्देशक ने इस फिल्म को भी उसी चश्मे से देखने की कोशिश की है। जबकि हर फिल्म एक अलग विजन की मांग करती है।

असली धड़कन तो मराठी फिल्म 'सैराट' में ही है। लगता है कि इस धड़क में उसकी आत्मा कहीं खो गई है।
चूंकि यह फिल्म बॉलीवुड फिल्म है और इसमें कुछ बदलाव भी किए गए हैं। पहला बदलाब तो उन्होंने यह किया है कि इसके लोकेल को महाराष्ट्र से उठाकर राजस्थान ले आए हैं और दूसरा इसके क्लाइमेक्स में।

 इसमें भी एक ही घिसी-पिटी प्रेम कहानी है, जिसमें एक अमीर लड़की (जाह्नवी कपूर) एक मिडिल क्लास लड़के (ईशान खट्टर) से प्रेम करने लगती है। उनके प्रेम में आड़े आता है उनका परिवार। जाह्नवी कपूर के पिता (आशुतोष राणा), एक राजनेता हैं। जाहिर है रसूखदार और बाहुबली से टक्कर लेना कोई आसान काम नहीं। अपने भरसक ये दोनों काफी कोशिश करते हैं, यहां तक कि उदयपुर से भागकर कोलकाता जा पहुंचते हैं। लेकिन अंततः पकड़े जाते हैं।

धड़क फिल्म से जाह्नवी कपूर ने इस फिल्म से डेब्यू किया है। जाह्नवी से इसलिए भी उम्मीदें बढ़ गई थीं क्योंकि वह बॉलीवुड की क्वीन श्रीदेवी की बेटी हैं। लेकिन अपनी मां की तरह एक्सप्रेशंस, हाव-भाव, डांस करना और एक्टिंग का हुनर शायद अभी जाह्नवी में पूरी तरह उतरा नहीं है। क्योंकि वह अपनी भौंहें  चढ़ाती तो हैं, लेकिन अपनी मां की तरह एक्टिंग नहीं कर पातीं और उनसे काफी पिछड़ती हुई नजर आती हैं। जाह्नवी कपूर की यह पहली ही फिल्म है इसलिए उन्हें बहुत परिश्रम करना पड़ेगा। वहीं वियाॅड द क्लाउड्स में ईशान खट्टर ने बेहतरीन अभिनय किया था लेकिन धड़क फिल्म में उन्होंने बहुत ही साधारण काम किया है। लगता है निर्देशक ने जितना काम उन्हें सौंपा, वे उतना काम करते गए। लेकिन कुछ खालीपन इस फिल्म में नजर आता है। आशुतोष राणा जो कि एक मंझे हुए कलाकार है, उनका अभिनय व्यर्थ हो गया है। क्योंकि निर्देशक ने उनको ज्यादा कुछ करने को नहीं दिया। बाकी सभी कलाकारों का काम ठीक-ठाक है क्योंकि पटकथा बहुत ही कमजोर है इसलिए बाकी कलाकार भी कुछ नहीं कर सकते थे।

     इस फिल्म के के गीत संगीत को अच्छा माना जा सकता है क्योंकि इसके तीन गाने हर जगह, रेडियो से लेकर टीवी तक पर सुने जा सकते हैं। सैराट फिल्म का लोकप्रिय गाना जिंगत की  वही धुन, वही भावनाएं इस फिल्म में भी देखने को मिलती हैं। 'पहली बार' गाने में ईशान को देखकर युवा पीढ़ी इसलिए इस गाने को पसंद कर सकती है क्योंकि उन्हें देखकर उसे भी पहले पहले प्यार का पहला जुनून, पहला एहसास, पहला नशा होता है। इस फिल्म का टाइटल ट्रैक धड़क ठीक है ।
     कुल मिलाकर यह फिल्म एक मामूली और औसत फिल्म बनकर रह गई है। संभवतः 90 के दशक में इसे पसंद किया जा सकता था, लेकिन आज के बदलते सिनेमा में यह फिट नहीं बैठती। हां, उदयपुर की खूबसूरती को बखूबी उभारा गया है।

-Dr Sadhna Agrawal, Assistant Professor, Delhi University
Email-agrawalsadhna2000@gmail.com
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