Satellite Shankar- एक फौजी का जिंदगीनामा


                                                       

फिल्म : सैटेलाइट शंकर

निर्देशक : इरफान कमल

अभिनय :सूरज पंचोली, पालोमी घोष, मेघा आकाश

संगीत : रोचक कोहली,तनिष्क बागची

गीत : कुमार, मिथुन, मनोज मुंतशिर

अवधि : 134 मिनट

रेटिंग : 2.5 स्टार


          यह फिल्म एक फौजी के जीवन पर केन्द्रित है कि उसे किनकिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फौज में जाने का मतलब ही है कि उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने देश के प्रति होती है। यही कारण है कि आकस्मिक mpपरिस्थितियों में भी फौजियों को छुट्टी नहीं मिलती ,चाहे कितना भी आवश्यक हो। सैटेलाइट तो एक प्रतीक है असली में वह एक खिलौना है। जिससे शंकर (सूरज पंचोली) घरवालों की याद आने पर उसके माध्यम से दूरियों को मिटा देता है और लोगों को खुशियां देता है।
        इस फिल्म में एक फौजी को अपनी बहन की शादी में जाने के लिए भी अनुमति नहीं मिलती और उसकी छुट्टी रद्द कर दी जाती है। तभी शंकर को घायल होने की वजह से आठ दिन के आराम करने की सलाह दी जाती है। वह सोचता है कि क्या हुआ अगर बाकी साथियों को घर जाने का मौका नहीं मिला, वह सभी साथियों की कमी उनके घर जाकर पूरा करेगा। और वह इन आठ दिनों के लिए दूसरे साथियों के घर जाने के लिए निकल पड़ता है। इसी क्रम में वह किसी की बहन की शादी में शामिल होता है तो किसी के परिवार में जमीनजायदाद के मामले का हल निकालता है। उसके पास केवल आठ दिन हैं और काम बहुत ज्यादा। क्योंकि उसे केवल आठ दिनों के लिए ही अनुमति मिली है और उसके बाद हरहाल में उसे सीमा पर उपस्थित होना है। इसीलिए उसे अपने लिए यानी अपनी मां के आंख के आपरेशन कराने का भी वक्त नहीं है लेकिन एक मित्र की मां के कहने पर वह अपने घर अपनी मां के इलाज के लिए पहुंच जाता है। उन आठ दिनों के सफर में वह बहुत सारे लोगों की अपनी जान को खतरे में डालकर भी मदद करता है। उसे कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। उसी सफर में उसकी मुलाकात एक ब्लागर से होती है जो उसकी हर गतिविधि से पूरे देश को अवगत कराती है।
         यह फिल्म हमें एक फौजी के जीवन की कठिनाइयों से रुवरु तो कराती ही है, साथ ही यह संदेश भी देती है कि पूरा देश जो सुखचैन से अपनी जिन्दगी जी रहा है तो केवल इन्हीं फौजियों के कारण। क्योंकि एक फौजी अपनी निजी जिन्दगी को भुलाकर राष्ट्र के प्रति पूरी ईमानदारी और निष्ठा से समर्पित होता है। सूरज पंचोली ने इसमें शानदार काम किया है। साथ ही ब्लागर के रूप में पालोमी घोष भी अच्छी लगी हैं। शंकर की होने वाली पत्नी के रूप में मेघा आकाश का काम सराहनीय है। बाकी कलाकारों का काम भी ठीकठाक है। गीतसंगीत ठीक है।



 © Sadhna Agrawal
 (Film Critic and Asst. Prof) 









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