Luka Chuppi Film Review: 3/5


                        लिव इन रिलेशनशिप का अंतर्द्धंद्ध
                                                                                            

फिल्म : लुका छुपी
निर्देशक: लक्ष्मन उतेकर
अभिनय : कार्तिक आर्यन, कृति सैनन, अपारशक्ति खुराना, पंकज त्रिपाठी, विनय पाठक, अतुल श्रीवास्तव
संगीत : केतन सोढा
अवधि: 126 मिनट
रेटिंग : 3 स्टार

निर्देशक लक्ष्मन उतेकर की यह फिल्म एक रोमाटिंक कामेडी है। हालांकि इसका विषय कोई नया नहीं है क्योंकि लिव इन रिलेशनशिप पर पहले भी फिल्में चुकी हैं। लेकिन इसमें कॉमेडी के घोल में  आधुनिकता के साथ नैतिकता का तड़का लगाया गया है।


           छोटे शहर यानी मथुरा की लड़की रश्मि (कृति सैनन) आधुनिकता के चलते शादी से पहले लिव इन में रहना चाहती है जबकि उसके पिता संस्कृति मंच चलाते हैं और प्रेम करने वालों के सख्त खिलाफ ही नहीं हैं बल्कि उनका मुंह काला करके पूरे शहर में उनको बेइज्जत करते हैं। रश्मि ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है और वह गुड्डु शुक्ला (कार्तिक आर्यन) के न्यूज चैनल में इंटर्नशिप करने लगती है। दोनों में प्यार हो जाता है। लेकिन समस्या यह है कि छोटे शहर में उनको कोई एकांत नहीं मिलता, जहां वे मिल सकें। गुड्डु का दोस्त अब्बास (अपारशक्ति खुराना) उनको सलाह देता है कि एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में ग्वालियर जाना ठीक रहेगा। रश्मि लिव इन में रहना चाहती है तो भला गुड्डु को क्या ऐतराज हो सकता था। लेकिन ग्वालियर में रहने के लिए वे शादीशुदा होने का दिखावा करते लिव इन में रहने लगते हैं। उधर घरवालों को सूचना मिल जाती है कि दोनों ने शादी कर ली है। फिर क्या था तमाम कहासुनी के बाद दोनों के परिवाले मान जाते हैं और उनको स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन सब कुछ इतना आसान हो जाता तो फिर मजा कैसे आता। अब इसमें पेच यह है कि रश्मि इस अपराध बोध से घिर जाती है कि उन्हें शादी कर लेनी चाहिए। बस शुरू हो जाता है फिल्मी तड़का। दोनों तरहतरह की कोशिश करते हैं कि चुपचाप शादी कर लें लेकिन बारबार पकड़े जाते हैं। बीचबीच में दर्शकों को हंसने के कई मौके मिलते हैं।

           गुड्डु की भूमिका में कार्तिक आर्यन बहुत अच्छे लगे हैं। उनकी अपनी तो कोई राय ही नहीं है जैसे पत्नी कह दे वही उनको करना है। लेकिन यहां सब कुछ रश्मि के हाथ में है। एक तरफ वह अति आधुनिक लड़की की तरह लिव इन में रहना पसंद करती है जबकि गुड्डु शुरू से ही शादी के पक्ष में था लेकिन रश्मि कुछ दिन लिव इन में रहने के बाद शादी करना चाहती है। उसे लगता है कि अब जब साथ में रहना ही है तो पहले शादी करना जरुरी है चाहे इसके लिए कितने ही पापड़ बेलने पड़े। अपारशक्ति खुराना अपने आइडाज देकर अपने दोस्त की मदद करना चाहता हैलेकिन फंस जाता है। बाकी कलाकारों का अभिनय ठीकठाक है। इसका एक गाना खूब पसंद किया जा रहा हैतू मेरी कोका कोला। बाकी कुछ पुराने गानों को फिट कर दिया गया है ट्रेंड के नाम पर।

         यह फिल्म दिखाती है कि प्यार करने वालों को एकांत पाने के लिए क्याक्या करना पड़ता है। दूसरे हमारा समाज जब तक शादी का सर्टिफिकेट नहीं दे देता तब तक प्यार करने का हक नहीं। जो लोग संस्कृति और नैतिकता की दुहाई देते नहीं थकते, वे भूल जाते हैं कि हमारे भारतीय समाज में राधाकृष्ण का उदाहरण सामने है। वे उनकी पूजा तो कर सकते हैं लेकिन अपने बच्चों को प्यार करने का मौका नहीं देना चाहते। कुछ मजेदार डायलॉग और दृश्य हैं जो आपको हंसाते तो हैं लेकिन सोचने को विवश भी करते हैं।

साधना अग्रवाल

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