Stree Film Review 2.5 /5


ओ स्त्री तुम कभी मत आना

      
फिल्म : स्त्री
निर्देशक :  अमर कौशिक
अभिनय : राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी, अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी, विजय राज, अतुल श्रीवास्तव 
संगीत : सचिन जिगर
गीत : वायु, बादशाह, जिगर सरैया
अवधि : 127 मिनट
रेटिंग : 2.5 स्टार


         स्त्री अमर कौशिक की डेब्यू फिल्म हैं जो एक हॉरर कॉमेडी जाॅनर की फिल्म है यूं तो अगर हम पीछे मुड़ कर देखें तो इस तरह की तमाम फिल्में बन चुकी हैं, जिनमें सबसे पहले हमारा ध्यान कमाल अमरोही की महल  फिल्म पर जाता है। उसके बाद भी समय-समय पर आई कई फिल्मों को देखा जा सकता है जिनमें मुख्य हैं- दो गज जमीन के नीचे, वीराना, पुराना मंदिर, बंद दरवाजा, तहखाना, पुरानी हवेली आदि। एक अंतराल के बाद वर्ष 2002 में फिर से हाॅरर फिल्में बनने लगीं जिनमें विक्रम भट्ट की राज और पिछले वर्ष आई अनुष्का शर्मा की परी को देखा जा सकता है।
        स्त्री भी इसी तरह की फिल्म है। यह मध्यप्रदेश के चंदेरी कस्बे की चुड़ैल के बारे में है जो रात में लोगों के दरवाजे पर दस्तक देती है। जिससे बचने के लिए लोग अपने घरों की दीवारों पर यह लिखवा देते हैं कि- ओ स्त्री कल आना। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि चार दिन तक चलने वाली पूजा में रात के अंधेरे में वह स्त्री पुरुषों को अपना शिकार बनाती है और उनके कपड़े उतार कर और वहीं फैंक देती है और उनको उठा ले जाती है। विक्की यानी राजकुमार राव अपने पिता (अतुल श्रीवास्तव) के साथ मिलकर लेडीज टेलर का काम करता है। उसके दो दोस्त बिट्टू(अपार शक्ति खुराना) और जना,(अभिषेक बनर्जी) मिलकर खूब मस्ती करते हैं। इसी बीच विक्की की मुलाकात श्रद्धा कपूर से होती है जिससे विक्की प्यार करने लगता है। विक्की के दोस्तों को शक होता है कि यही वह स्त्री है जो पुरुषों को उठा ले जाती है। क्योंकि वह विक्की को न तो अपना नाम बताती है और न ही दिन में किसी को दिखाई देती है। एक दिन वह स्त्री जना को भी अपना शिकार बना लेती है। बाद में जना लौट तो आता है लेकिन उसके ऊपर चुड़ैल का साया है। अब बिक्की और बिट्टू  रुद्र (पंकज त्रिपाठी) के पास मदद मांगने के लिए जाते हैं। वे सब उस स्त्री की तलाश में निकल पड़ते हैं। उनको पता चलता है कि वह स्त्री ऐसा इसलिए करती है क्योंकि इसी बस्ती के लोगों ने एक प्रेमी जोड़े को मार दिया था इसलिए वह बदला ले रही है। क्या विक्की उस स्त्री को पकड़ पाएगा या विक्की ही उसका अगला शिकार होगा, जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी।
      इस फिल्म के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई है कि एक स्त्री केवल प्यार और सम्मान चाहती है और कुछ नहीं। फिल्म की शुरुआत तो अच्छी कही जा सकती है लेकिन अंत तक आते-आते ट्रेक से उतरने लगती है। यह बात समझ में नहीं आती कि चोटी काटने के प्रसंग को आखिर क्यों जोड़ा गया है। दरअसल इस प्रकार की फिल्मों से लोगों के मन में भूत-प्रेत, चुड़ैल आदि से संबंधित अफवाहों, भय और भ्रम को बढ़ावा ही मिलता है जो गलत है और भी कई चीजें उटपटांग दिखाई गई हैं जैसे विक्की को ऐसी शक्ति प्राप्त है कि वह आंखों से किसी का भी नाप ले सकते हैं।
      राजकुमार राव ने बेहतरीन काम किया है।उनकी काॅमिक टाइमिंग भी अच्छी है।पंकज त्रिपाठी ने यह साबित कर दिया है कि वह एक उम्दा कलाकार हैं। श्रद्धा कपूर अच्छी लगी हैं। बिट्टू की भूमिका में अपारशक्ति खुराना और जना की भूमिका में अभिषेक बनर्जी का काम भी अच्छा है। बाकी कलाकारों का काम भी ठीक है। 
       इस फिल्म के गाने आपके ऊपर ज्यादा
असर नहीं छोड़ते। हाल ही में वायरल हुआ मीम 'आओ कभी हवेली पे' को लेकर कृति सेनन का एक आइटम नंबर है जो ठीक लगता है वैसे तो किसी भी फिल्म में एक ही आइटम नंबर काफी होता है लेकिन इसमें दो आइटम नंबर डाले गए हैं।अभी हाल ही में आई फिल्म सत्यमेव जयते में नोरा फतेही का दिलबर गाना जितना लोकप्रिय और चर्चा में रहा उतना इनका इस फिल्म में कमरिया हिला नहीं रहा शायद इसीलिए आओ कभी हवेली पे गाना कमरिया पर भारी पड़ता है। राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर पर फिल्माया नजर ना लग जाए कुछ हद तक इस फिल्म में अच्छा लगता है। मीका सिंह का गाया हुआ गाना 'मिलेगी मिलेगी' उनके बाकी गानों की ही तरह है ।
      इस फिल्म में मर्द को दर्द होगा जैसी टैग लाइन का इस्तेमाल करके दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश की गई है। लेकिन यह कहना ही पड़ेगा कि इस तरह की फिल्में अंधविश्वासों को परोस कर दर्शकों को न जाने किस दिशा में ले जा रही हैं और इस तरह की निराधार बातों को बढ़ावा देने का औचित्य समझ नहीं आता। फिर भी डायलॉग और कॉमिक पंच का कॉन्बिनेशन खासा मजेदार है।





साधना अग्रवाल

Film Critic & Assistant Professor, Delhi University
Phone-9891349058

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